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सोमवार, 3 सितंबर 2018

कृष्ण के बारे में बहुत कुछ...



भगवान् श्री कृष्ण को अलग अलग स्थानों में अलग अलग नामो से जाना जाता है।

* उत्तर प्रदेश में कृष्ण या गोपाल गोविन्द इत्यादि नामो से जानते है।

* राजस्थान में श्रीनाथजी या ठाकुरजी के नाम से जानते है।

* महाराष्ट्र में बिट्ठल के नाम से भगवान् जाने जाते है।

* उड़ीसा में जगन्नाथ के नाम से जाने जाते है।

* बंगाल में गोपालजी के नाम से जाने जाते है।

* दक्षिण भारत में वेंकटेश या गोविंदा के नाम से जाने जाते है।

* गुजरात में द्वारिकाधीश के नाम से जाने जाते है।

* असम ,त्रिपुरा,नेपाल इत्यादि पूर्वोत्तर क्षेत्रो में कृष्ण नाम से ही पूजा होती है।

* मलेशिया, इंडोनेशिया, अमेरिका, इंग्लैंड, फ़्रांस इत्यादि देशो में कृष्ण नाम ही विख्यात है।

* गोविन्द या गोपाल में "गो" शब्द का अर्थ गाय एवं इन्द्रियों , दोनों से है। गो एक संस्कृत शब्द है और ऋग्वेद में गो का अर्थ होता है मनुष्य की इंद्रिया...जो इन्द्रियों का विजेता हो जिसके वश में इंद्रिया हो वही गोविंद है गोपाल है।

* श्री कृष्ण के पिता का नाम वसुदेव था इसलिए इन्हें आजीवन "वासुदेव" के नाम से जाना गया। श्री कृष्ण के दादा का नाम शूरसेन था..

* श्री कृष्ण का जन्म उत्तर प्रदेश के मथुरा जनपद के राजा कंस की जेल में हुआ था।

* श्री कृष्ण के भाई बलराम थे लेकिन उद्धव और अंगिरस उनके चचेरे भाई थे,


* श्री कृष्ण ने 16000 राजकुमारियों को असम के राजा नरकासुर की कारागार से मुक्त कराया था और उन राजकुमारियों को आत्महत्या से रोकने के लिए मजबूरी में उनके सम्मान हेतु उनसे विवाह किया था।

क्योंकि उस युग में हरण की हुयी स्त्री अछूत समझी जाती थी और समाज उन स्त्रियों को अपनाता नहीं था।।

* श्री कृष्ण की मूल पटरानी एक ही थी जिनका नाम रुक्मणी था जो महाराष्ट्र के विदर्भ राज्य के राजा रुक्मी की बहन थी।। रुक्मी शिशुपाल का मित्र था और श्री कृष्ण का शत्रु ।

* दुर्योधन श्री कृष्ण का समधी था और उसकी बेटी लक्ष्मणा का विवाह श्री कृष्ण के पुत्र साम्ब के साथ हुआ था।

* श्री कृष्ण के धनुष का नाम सारंग था। शंख का नाम पाञ्चजन्य था। चक्र का नाम सुदर्शन था। उनकी प्रेमिका का नाम राधारानी था जो बरसाना के सरपंच वृषभानु की बेटी थी। श्री कृष्ण राधारानी से निष्काम और निश्वार्थ प्रेम करते थे। राधारानी श्री कृष्ण से उम्र में बहुत बड़ी थी। लगभग 6 साल से भी ज्यादा का अंतर था।

श्री कृष्ण ने 14 वर्ष की उम्र में वृंदावन छोड़ दिया था।। और उसके बाद वो राधा से कभी नहीं मिले।

* श्री कृष्ण विद्या अर्जित करने हेतु मथुरा से उज्जैन मध्य प्रदेश आये थे। और यहाँ उन्होंने उच्च कोटि के ब्राह्मण महर्षि सान्दीपनि से अलौकिक विद्याओ का ज्ञान अर्जित किया था।।

* श्री कृष्ण की कुल 125 वर्ष धरती पर रहे । उनके शरीर का रंग गहरा काला था और उनके शरीर से 24 घंटे पवित्र अष्टगंध महकता था।
उनके वस्त्र रेशम के पीले रंग के होते थे और मस्तक पर मोरमुकुट शोभा देता था।
उनके सारथि का नाम दारुक था और उनके रथ में चार घोड़े जुते होते थे। उनकी दोनो आँखों में प्रचंड सम्मोहन था।

* श्री कृष्ण के कुलगुरु महर्षि शांडिल्य थे।

* श्री कृष्ण का नामकरण महर्षि गर्ग ने किया था।

* श्री कृष्ण के बड़े पोते का नाम अनिरुद्ध था जिसके लिए श्री कृष्ण ने बाणासुर और भगवान् शिव से युद्ध करके उन्हें पराजित किया था।

* श्री कृष्ण ने गुजरात के समुद्र के बीचो बीच द्वारिका नाम की राजधानी बसाई थी। द्वारिका पूरी सोने की थी और उसका निर्माण देवशिल्पी विश्वकर्मा ने किया था।

* श्री कृष्ण को ज़रा नाम के शिकारी का बाण उनके पैर के अंगूठे मे लगा वो शिकारी पूर्व जन्म का बाली था,बाण लगने के पश्चात भगवान स्वलोक धाम को गमन कर गए।

* श्री कृष्ण ने हरियाणा के कुरुक्षेत्र में अर्जुन को पवित्र गीता का ज्ञान रविवार शुक्ल पक्ष एकादशी के दिन मात्र 45 मिनट में दे दिया था।

* श्री कृष्ण ने सिर्फ एक बार बाल्यावस्था में नदी में नग्न स्नान कर रही स्त्रियों के वस्त्र चुराए थे और उन्हें अगली बार यु खुले में नग्न स्नान न करने की नसीहत दी थी।

* श्री कृष्ण के अनुसार गौ हत्या करने वाला असुर है और उसको जीने का कोई अधिकार नहीं।

* श्री कृष्ण अवतार नहीं थे बल्कि अवतारी थे....जिसका अर्थ होता है "पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान्" न ही उनका जन्म साधारण मनुष्य की तरह हुआ था और न ही उनकी मृत्यु हुयी थी।

सर्वान् धर्मान परित्यजम मामेकं शरणम् व्रज
अहम् त्वम् सर्व पापेभ्यो मोक्षस्यामी मा शुच--
( भगवद् गीता अध्याय 18 )

डॉ.सौरभ श्रीवास्तव

गुरुवार, 6 अगस्त 2015

भोजन चुराती और बचाती दो मछलियां

थाईलैंड के मैन्ग्रोव जंगल में एक मछली रहती है आर्चरफिश। उसके नाम का मतलब है कि वह तीर चलाती है। दरअसल यह मछली अपने मुंह से पानी की धार मारती है और ऊपर किसी डाल पर बैठे कीट को मार गिराती है। फिर जैसे ही यह कीड़ा पानी में गिरता है, उसे झपट लेती है। मगर पानी में कई और मछलियां भी तो रहती हैं। आर्चरफिश के साथ उसी प्राकृतवास में एक और मछली रहती है हाफबीक। हाफबीक की संख्या भी आम तौर पर ज़्यादा होती है। ये हाफबीक फिराक में रहती हैं कि आर्चरफिश के तीर से पानी में टपके शिकार को झपट लें। ऐसे में आर्चरफिश के तीर तो बेकार जाएंगे।
इस होड़ को समझने के लिए जर्मनी के बैरॉथ विश्वविद्यालय के स्टीफन शूस्टर के दल ने इन दो मछलियों की वीडियो विज्ञान समाचार भोजन चुराती और बचाती दो मछलियां शूटिंग भी की और इनकी शरीर रचना का अध्ययन भी किया। अध्ययन से पता चला कि दोनों ही मछलियों में इस प्रतिस्पर्धा ने कुछ लक्षण पैदा किए हैं। जैसे आर्चरफिश में तेज़ी से हरकत करने और यह पूर्वानुमान करने का गुण दिखाई पड़ता है कि उनके तीर से शिकार कहां गिरेगा। वे पहले से ही उस स्थान की ओर गति शुरू कर देती हैं। उनकी हरकत भी बहुत तेज़ होती है। अर्थात आर्चरफिश टपकते कीड़े की गति और दिशा को देखकर तुरंत उस स्थान पर पहुंचने में माहिर होती है जहां वह गिरने वाला है। प्रयोगों के दौरान देखा गया कि आर्चरफिश को सही जगह पहुंचने में औसतन 90 मिली सेकंड लगे जबकि उसकी प्रतिस्पर्धी हाफबीक को 235 मिली सेकंड। मगर इस होड़ में आर्चरफिश को एक नुकसान भी है। रात के समय वह कम देख पाती है जबकि हाफबीक लगभग घुप अंधेरे में भी देख लेती है। दरअसल, हाफबीक की ‘देखने’ की क्षमता उनकी पीठ की चमड़ी पर स्थित संवेदी कोशिकाओं की वजह से होती है। ये कोशिकाएं पानी की सतह पर किसी भी हलचल को भांप लेती हैं। तो रात के समय आर्चरफिश तीर से जो शिकार गिराती है वह अक्सर हाफबीक के हाथ लगते हैं। इसलिए आर्चरफिश ने रात में शिकार करना ही छोड़ दिया है। शूस्टर का कहना है कि उनके अध्ययन से पता चलता है कि प्रजातियों के बीच प्रतिस्पर्धा जैव विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इसकी वजह से जंतु न सिर्फ नए तौर-तरीके सीखते हैं बल्कि संज्ञान क्षमता का विकास भी होता है। (रुाोत फीचर्स)